शादी का झांसा, फोटो नकली और लाखों की ठगी! फर्जी मैरिज वेबसाइट का बड़ा भंडाफोड़, कॉल सेंटर से मिला चौंकाने वाला सामान
सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में शादी के नाम पर कथित तौर पर लोगों से ऑनलाइन ठगी करने वाले एक बड़े साइबर गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। थाना सदर बाजार और साइबर क्राइम थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में कोर्ट रोड स्थित गिल कॉलोनी में संचालित एक कथित फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारकर भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी सूरज मरावी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। वहीं मौके से मिली तीन युवतियों से पूछताछ के बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उन्हें उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।
शादी का रिश्ता दिलाने के नाम पर चलता था कथित खेल
पुलिस के अनुसार, आरोपी "Perfect Rishtey Proprietor" नाम से एक वेबसाइट संचालित कर रहे थे।
जांच में सामने आया है कि वेबसाइट के माध्यम से शादी के इच्छुक लोगों का डेटा जुटाया जाता था। इसके बाद कॉल सेंटर में काम करने वाले कर्मचारी संभावित ग्राहकों से संपर्क करते और उन्हें उपयुक्त रिश्ता दिलाने का भरोसा देते थे।
यदि कोई व्यक्ति बातचीत में रुचि दिखाता, तो उससे रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग चार्ज और अन्य शुल्क के नाम पर ऑनलाइन पैसे जमा कराने के लिए कहा जाता था।
इंटरनेट से डाउनलोड की जाती थीं तस्वीरें
पुलिस के अनुसार, जब कोई ग्राहक लड़की की फोटो या बातचीत की मांग करता था, तब कथित तौर पर इंटरनेट से तस्वीरें डाउनलोड कर भेजी जाती थीं।
इसके अलावा कॉल सेंटर में मौजूद युवतियों से ग्राहकों की बातचीत कराकर यह विश्वास दिलाया जाता था कि रिश्ता वास्तविक है।
जांच अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में इस प्रकार की कार्यप्रणाली सामने आई है, जिसकी आगे पुष्टि की जा रही है।
पैसे मिलते ही नंबर कर देते थे ब्लॉक
पुलिस का दावा है कि जैसे ही पीड़ित व्यक्ति ऑनलाइन भुगतान कर देता था, उसके बाद कथित तौर पर उसका मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया जाता था।
इसके बाद ग्राहक न तो वेबसाइट से संपर्क कर पाता था और न ही कॉल सेंटर से कोई जवाब मिलता था।
इसी तरीके से कई लोगों से ठगी किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
कॉल सेंटर में काम करती थीं कई युवतियां
पूछताछ में हिरासत में लिए गए आरोपी ने पुलिस को बताया कि इस कथित रैकेट में लगभग 8 से 9 युवतियां काम करती थीं।
प्रत्येक कर्मचारी को अलग-अलग कीपैड मोबाइल फोन उपलब्ध कराए गए थे।
उन्हें लैपटॉप और मोबाइल के माध्यम से संभावित ग्राहकों का डेटा दिया जाता था, जिसके आधार पर वे लोगों को फोन कर शादी का प्रस्ताव देती थीं।
हालांकि पुलिस आरोपी के इस कथित बयान का सत्यापन भी कर रही है।
छापेमारी में मिला भारी सामान
पुलिस ने कॉल सेंटर से बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज बरामद किए हैं।
बरामद सामान में शामिल हैं—
16 कीपैड मोबाइल फोन
3 एंड्रॉयड मोबाइल
एक लैपटॉप
9 मॉनिटर
7 सीपीयू
बायोमैट्रिक डिवाइस
एचडीएफसी बैंक के दो क्यूआर कोड
चेकबुक
कार्यालय की मोहर
प्रिंटर
वाई-फाई उपकरण
लैंडलाइन फोन
अन्य दस्तावेज
पुलिस इन सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराएगी ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
साइबर ठगी का नया तरीका
जांच एजेंसियों का कहना है कि साइबर अपराधी लगातार लोगों को ठगने के नए-नए तरीके अपना रहे हैं।
पहले जहां नौकरी, लॉटरी और निवेश के नाम पर धोखाधड़ी होती थी, वहीं अब शादी और मैट्रिमोनियल वेबसाइटों का भी दुरुपयोग किए जाने के मामले सामने आने लगे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में लोग भावनात्मक रूप से जल्दी भरोसा कर लेते हैं, जिसका फायदा अपराधी उठाने की कोशिश करते हैं।
गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश
पुलिस ने इस मामले में संबंधित धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।
अब पुलिस इस कथित गिरोह के मास्टरमाइंड और अन्य फरार आरोपियों की तलाश कर रही है।
साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क का संचालन केवल सहारनपुर से होता था या अन्य राज्यों तक भी इसका विस्तार था।
बैंक खातों की होगी जांच
पुलिस अब आरोपियों से जुड़े बैंक खातों, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और डिजिटल भुगतान के रिकॉर्ड की भी जांच करेगी।
यदि जांच में बड़ी वित्तीय लेन-देन सामने आते हैं, तो आर्थिक अपराध शाखा की भी मदद ली जा सकती है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित ठगी से प्राप्त रकम किन-किन खातों में भेजी गई।
कितने लोग हुए शिकार?
फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित फर्जी मैरिज वेबसाइट के माध्यम से अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया गया।
इसके लिए वेबसाइट के रिकॉर्ड, कॉल डिटेल, भुगतान रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की जांच की जा रही है।
यदि अन्य राज्यों से भी शिकायतें सामने आती हैं, तो जांच का दायरा और बढ़ाया जा सकता है।
लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी मैट्रिमोनियल वेबसाइट या ऑनलाइन एजेंसी पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांचें।
केवल सत्यापित प्लेटफॉर्म का उपयोग करें।
बिना पुष्टि के किसी को ऑनलाइन पैसे न भेजें।
वीडियो कॉल या व्यक्तिगत सत्यापन के बिना रिश्ता तय न करें।
संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन या पुलिस से संपर्क करें।
जांच जारी
फिलहाल सहारनपुर पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच के बाद ही पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकेगा। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं, आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगी।

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